कहानी पेंसिल की



तो आज मैं कुछ सृजनात्मक लेखन करने की सोच रहा था ...की तभी मैंने अपनी छोटी बेहेन को पेंसिल से ड्राइंग करते देखा और ख्यालों में खो सा गया। 

   
  मुझे याद आने लगे बचपन के दिन जब में भी पेंसिल से बोहोत खेला करता था खेलने को ज्यादा  कुछ नहीं था मेरे पास उस समय और बचपने में खिलोनो की जरुरत किसे होती थी। मैं तो सारा दिन पेंसिल लेके इधर उधर कभी कॉपी तो कभी किताबों में, तो कभी दीवारों पर लिखता नहीं तो चित्र तो बना ही देता था। हलाकि मेरी लिखावट कुछ ख़ास नहीं थी शायद इस लिए डाँट भी बोहोत खाता था। 






     आज जब मैंने अपनी बेहेन को ड्राइंग करते देखा तो उसके पास तो बोहोत सारी पेंसिल थी तो मै अचम्भे में पड़ गया और उससे पुछा की इतनी सारी पेंसिल का तुम करती क्या हो, उस्सने मुझे बताय की हर पेंसिल का काम अलग है। मै थोड़ी देर रुका फिर पुछा "वो कैसे "उसने  बताया की " एक ड्राइंग के लिए है एक ड्राइंग को डार्क करने के लिए ये शेडिंग के लिए ये डार्क शेडिंग के ..... " और अनेक तरह की चीजे बताने लगी। मैंने सोचा की आज कल बच्चों को कितना काम करना पड़ता है, मैं तो ये भी याद नहीं रख पाउँगा की कौन सी पेंसिल किस काम के लिए है। 

   
 तभी मुझे याद आया की मुझे आज चाचा जी के यहाँ जाना था।  मैं घर से निकला और चाचा जी के यहाँ पहुंचा और देखा की चाचा जी छोटे को पेंसिल पकड़ना सीखा रहे है, मैं रुका और गौर से देखा की छोटे ने पेंसिल को बड़े अजीब ढंग पकड़ा है। फिर मै याद करने लगा की कैसे मेरे दोस्त अलग-अलग तरीके से लिखते थे और मैं हमेशा उनकी नक़ल करने की कोशिश करता था ताकि मेरी लिखावट सुधर जाये पर ऐसा कुछ तो हुआ नहीं लेकिन याद करने के लिए एक बड़ी ही सुहावनी याद  मिल गयी। आज भी छोटे बच्चों को लिखते देकता हूँ तो बड़ा ही प्रेरित हो उठता हूँ। 

    मैं आज कल बोहोत लोगों देखता हु, जो कहते हैं की पेंसिल को पेन से इस लिए बदल दिया जाता है ताकि हमें पता चले की उम्र के साथ गलतियों को बदलना और ठीक करना मुश्किल हो जाता है मैं मानता हूँ सब तकियानूसी बाते हैं।दोनों की उपयोगिता अलग है, आखिर कलम को ड्राइंग के लिए और पेंसिल को इतिहास लिखने के लिए इस्तमाल किया जा सकता है भला ये तो वही "एप्पल विथ ओरेंजेस" वाली बात हो गयी। 

   मेरा काम तो आज कल बस टाइपिंग का ही बचा है लेकिन किसी को पेंसिल से लिखते देख मै भी उठा ही लेता हूँ। उसका भी अपना आनंद है।  एक एस्पिरिंग लेखक होने के नाते मेरा कोई ख़ास रिश्ता तो नहीं है पेंसिल से किन्तु एक लिटरेचर का विद्यार्थी होने के नाते कुछ अटूट सम्बन्ध अवश्य है।  

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