वो जानते हैं हमें

 वो हमको तब से जानते हैं 

जब हम चूतिया हुआ करते थे

मै को हम कहा करते थे

किताबें ना छुआ करते थे

बस हर गली यूं ही घूमा करते थे

हर वक्त कन्याओं को घूरा करते थे

जब मित्रों के घर "सलीपोवर" किया करते थे

सुबह दौड़ लगा के भी स्कूल देर से पोहोंचा करते थे

सुबह शाम जब हम खेला करते थे

या फिर घर में जब पेले जाते थे

जब हम खिलखिला के हसा करते थे

जब हम बिलबिला के रोया करते थे

वो थे बड़े मस्त...

लेकिन वो पूजा की जगह दुआ किया करते थे 

मंदिर की जगह मस्जिद में सुबह किया करते थे

बाकी दोस्त उनसे चिद्धा करते थे

रोज़ हमारे कान भरा करते थे

तो फिर दंगे हुए...

उसके बाद तो तोड़ दी दोस्ती मैंने

अब हम टोले - कम - गिरोह में रहा करते थे

दलों के नेता बना फिरा करते थे

ज़वानी इसी में घुसा बैठे थे

और अब हम...

रोज़ रात को दो "पेग" पिया करते हैं

फ़िर सिसक सिसक के रोया करते हैं

आज कल ताश भी खेला करते हैं

गली के किनारे, पैड़ के नीचे बैठ होड हल्ला किया करते हैं

ऐसे ही दिन व्यतीत किया करतें हैं

और वो तो...

आज भी साइकिल से "कौम्मयूट" किया करते हैं

देखते हैं हमारी तरफ़

हम भी देखतें हैं घूर के तरफ़ उनके

दो बर्फ सी सफेद भोहों के बीच दो मटर सी आंख लिए

वो मुस्कुराते हैं खुश्की से देख के हमें

हम नज़र चुरा लिया करतें हैं

शायद वो जानते हैं हमें आज भी

यही दिलासा दिल को दिया करते हैं।

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