हस्ते मुस्कुराते चेहरे


एक हस्ता चेहरा,
एक मुस्कुराता चेहरा
दोनों में "कॉमन" कुछ भी नहीं
मुस्कान वो खुशी है जो हसी तक नहीं पहुंची
और मुस्कान अपने आप में कुछ खास नहीं
वो निर्भर है आपके "एंट्राज" पर,
हालाकि वो किसी भी ऐर-गैरे के साथ नहीं आती 
और अगर आती है तो नपी-तुली आती है
लेकिन हसी तो बेबाक है,
एक शेर की दहाड़ है,
और हम अभिनेताओं की हसी भी कोई हसी है, 
वो तो है अभिनय
एक रास्ता किसी किरदार मै उतरने
वो नकली है हर कोशिश के बाद
जैसे नकली है अभिनेता का हर एक काम
हसी की खुशी तो बच्चों के चेहरे पर है
कहां है उसे इतनी आज़ादी
हसी शायद प्यार का भी है इज़हार
जो करती है शब्दों के दरिया को पार
मुस्कान यहां भी आती है,
चेहरे के थकने के बाद
एक हसी "ईमोजी" वाली भी है
जो भाषा के बंधन को
करती है तार
लेकिन बेतुकी सी है ये भी
इसका नहीं है कोई प्रभाव
जैसे होता है "एक्रोंनीम" छुपी हसी पर 
बाकी "लेटर्स" का दबाव
और मुस्कान के बारे में और क्या बताऊं
वो है किसी का नाम
वो ज़ेहन में रहती है, सपनो में आती है
रात को बड़बड़ाते हैं उसका नाम
खैर मुस्कराहट भी ठीक है
 किसी बुद्धिजीवी के चेहरे पर 
 जिसके लिए हस्ना है 
 मुश्किल का काम।

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