सफर से लोट के जब आतें हैं

जब हम सफर से लोट के आतें हैं
तो अक्सर कोई अलग ऊर्जा लातें हैं
ये ऊर्जा बहुत चीजों का मिश्रण है
इसमें किसी की नजर से पैदा हुआ उत्साह भी है
तो उससे बात न कर पाने का गम भी
नई मोहोल में पुरानी यादों
पे एक नया दृष्टिकोण भी है
तो एक कविता की आहट भी है
उसे लिख न पाने का अफसोस भी है
नई जगह पे मिले लोगों का उत्साह भी है
उनसे बिदाई का दुख भी है
किसी नए रास्ते पे चलके उसको 
अपना बनाने का अनुभव भी है
तो उसे भुला देने का खालीपन भी है
नए सामानों पे पड़े सस्ते दामों का हल्ला है
तो उन समान के सही न निकलने की निराशा भी है
नए नए पकवान का स्वाद भी है
तो उनसे अगले दिन पेट खराब भी है
ये अलग है सफर का अनुभव 
इसमें शायद जिंदगी का मिनिएचर अनुभव है
सारी घटनाएं एक छोटे से अंतराल में सिकुड़ जाति हैं
उम्र कुछ ही दिनों में कई साल बढ़ जाती है
यही शायद सफर का अर्थ है
हम यात्रा भले ही बाहर करतें हैं
लेकिन सफर तो मन के भीतर ही होता है
यह अनुभव, यह सफर, यह ऊर्जा
ये शायद एक ही रास्ते पे आने वाले अनेक
स्टॉपेज हैं जिंदगी के
और ज़िंदगी है कोई लोहपथ गामिनी

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