अस्तित्व

ये कविता आखिर होती क्या है
हाल-ए-दिल का बयान ही तो है
फिर सरल सी बात को कहने को
ये चांद, तारो, फूल, बगीचों के
इस्तेमाल का क्या अर्थ है
ये बेपनाह मोहबत्त के एहसास
भौतिक माप दंड में इनका क्या अर्थ है
भावना का सही माप तो स्वाद में है
मुझे गुलाब जामुन सी लगी उसकी आरज़ू
कितना सुंदर और घिनौना है ये वाक्य
लेकिन रस तो आपके मन में ही है
इसपे बेवजह झगड़ते गुजरते वक्त का क्या अर्थ है
कविता बेवजह ही है
साहित्य बेवजह ही है
वजह है अस्तित्व का कुछ यूं
जैसे दूर किसी आकाश गंगा में
दो ग्रहों के टकराने की घटित घटना
का एक मात्र साक्षी है वक्त
लेकिन वक्त की साक्षी व अनुभूति
का अर्थ मेरे अस्तित्व से ही तो है

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